महराजगंज के लेहड़ा देवी मंदिर पर भक्तों की उमड़ी भीड़

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महराजगंज जिले के फरेंदा क्षेत्र में स्थित प्राचीन लेहड़ा देवी मंदिर (जिसे आद्रवन लेहड़ा देवी मंदिर भी कहा जाता है) शक्तिपीठ के रूप में विख्यात है। यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है, जहां मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने मां दुर्गा की आराधना की थी। अर्जुन द्वारा इसकी स्थापना की कथा प्रचलित है, और यह जंगल के बीचों-बीच स्थित होने के कारण आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।


नवरात्रि पर भक्तों का सैलाब

वर्तमान में शारदीय नवरात्रि (2025) के अवसर पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। 22 सितंबर 2025 को मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, जो नेपाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आ रहे हैं। भक्त सुबह से लंबी कतारों में खड़े होकर मां के दर्शन कर रहे हैं। 


पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस अधीक्षक ने थाना बृजमनगंज के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नवरात्रि शांतिपूर्वक संपन्न हो। इसके अलावा, मंदिर परिसर में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया गया है, जिससे भक्तों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो रही है।


मंदिर की मान्यताएं और इतिहास

महाभारत कनेक्शन कथा के अनुसार, युधिष्ठिर ने यहां यक्ष के प्रश्नों का उत्तर दिया था। पांडवों को युद्ध में विजय का आशीर्वाद यहीं मिला। जल समाधि की कथा एक मान्यता है कि मां एक किशोरी रूप में नदी पार कर रही थीं, जब नाविक ने छेड़खानी की तो मां ने नाव सहित जल समाधि ले ली। इसी स्थान पर मंदिर की स्थापना हुई।


साल भर की भीड़ सामान्य दिनों में भी भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्रि पर संख्या कई गुना बढ़ जाती है। मंदिर के पास पौहारी बाबा का प्राचीन मठ है, जहां 24 घंटे अखंड ज्योति जलती रहती है।


मंदिर नेपाल सीमा के निकट होने से अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालु भी यहां पहुंचते हैं। यदि आप दर्शन के इच्छुक हैं, तो फरेंदा तहसील से बृजमनगंज मार्ग पर 5-8 किमी की दूरी पर स्थित है। मां लेहड़ा देवी की जय! जय माता दी!

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