फरेंदा बनकटी हॉस्पिटल की दशा बहुत ही दयनीय हो गई है आपको बताते चले की हमारे मुख्यमंत्री जी के सपनों पर पानी फेरने पर लग गए हैं बनकटी सीएचसी हॉस्पिटल के स्टाफ डॉक्टर यहां पर मरीजों को इलाज काम किया जाता है रेफर ज्यादा बनाने की आदत हो गई है मिली सूत्रों के मुताबिक मरीज को यहां पर चेक करके बाहर दवा लिखा जाता है और बाहर मेडिकल स्टोर से कमीशन पर दवा का डीलिंग किया जाता है आए दिन गरीब लाचार बेचारे मरीज बाहर दवा महंगा होने से नहीं ले पा रहे हैं दर-दर भटक कर जान दे दे रहे हैं आज दिन शनिवार को टीवी के मरीज सुबह 10:00 बजे से ही दर-दर हॉस्पिटल में भटक रहा है ना कोई डॉक्टर ना कोई फार्मासिस्ट नहीं दिख रहे हैं दवा देने वाला व्यक्ति बनकटी के बगल से ही पकड़ पकड़ कर लाते हैं जो दवा देते हैं पर्ची काटते हैं वहां पर कोई फार्मासिस्ट कोई वार्ड बॉय नहीं रहता है और तो और यहां पर अन्दर से कोई दवा नहीं उपलब्ध हो पा रहा है सारा दवा की बिक्री जब बाहर हो रही है तो दवा कहां से अंदर रहेगा और सब डॉक्टर बाहर की दवा लिख रहे हैं गरीब लाचार कैसे मंगा दवा बाहर ले पाएगा जो कि हमारे मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री जी ने हर सुविधा चिकित्सा सेवा में कर दी है उसके बाद भी ऐसे डॉक्टर जिसे लोग भगवान मानते हैं ऐसे ही लोग बनकटी सीएचसी के स्टाफ गरीबों का खून चूसने का कार्य कर रहे हैं। जब पत्रकार उत्तर प्रदेश हेड एके मिश्रा द्वारा अधिक्षक से इस पर बात किया गया तो अधिक्षक महोदय ने बोले यहां पर दवा तो है बहुत ही धीमी आवाज में बात करते हुए फोन को काट दिया गया।
अब देखना है कि इस पर अब सीएमओ महोदय क्या कार्रवाई करती है ।
और आपको बताते चले कि यहां पर लोग कहते हैं इमरजेंसी सेवा 24 घंटे उपलब्ध है लेकिन इस अस्पताल पर कोई इमरजेंसी उपलब्ध नहीं है ना कोई डॉक्टर और यहां पर बैठे हुए स्टाफ भी कुछ अलग नजर अंदाज दिखाते हैं मरीज के साथ जब हमारा रिपोर्टर हॉस्पिटल शाम को करीब 5:00 बजे गया तो वहां पर एमरजैंसी डॉक्टर कोई नहीं दिखे और स्टाफ फार्मासिस्ट बैठे थे उन्होंने कहा कि अभी आएंगे बैठिए काफी देर तक कोई डॉक्टर नहीं दिखे वहां पर अगल-बगल के लड़कों को रखकर ट्रीटमेंट मरहम पट्टी कराया जा रहा है और वही लोग डॉक्टर बने हुए हैं मरीज को जाते ही डॉक्टर रहते नदारत।
भगवान भरोसे चल रहा बनकटी सीएचसी।
नेशनल एंटी करप्शन एंड इन्वेस्टिगेशन जांच आयोग ऑफिसर एके मिश्रा उत्तर प्रदेश।
उत्तर प्रदेश हेड एके मिश्रा की ख़ास रिपोर्ट
