दुर्गा पूजा महोत्सव का शारदीय नवरात्र कार्यक्रम संपन्न, विसर्जन यात्रा में गूंजे माता के जयकारे

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शारदीय नवरात्र की समाप्ति के पश्चात दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हुआ. इस दौरान शहर के विभिन्न गली-मोहल्लों तथा समारोह स्थलों पर चल रही गरबा रास की धूम भी थम गई. गरबा स्थलों पर स्थापित माताजी की प्रतिमाओं को विसर्जित करने के दौरान दिनभर शहर में जय माता दी के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा. इसी क्रम में श्री दुर्गा पूजा महोत्सव समिति की ओर से खडखोड़ी स्थित समारोह स्थल पर दुर्गा मां की प्रतिमा को विसर्जित किए जाने से पूर्व शहर में विसर्जन यात्रा निकाली गई. 
 
खडखोड़ी से प्रारंभ हुई विसर्जन यात्रा राजपुर से कोल्हुई रोड से लोटन नदी पर पहुंची, जहां पर मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया गया. विसर्जन यात्रा में बड़ी संख्या में श्री दुर्गा पूजा महोत्सव समिति के सदस्यों, सचिदानंद राय सुबाश राय , आदर्श राय , अरुण राय , हरिनाथ राय , शशांक पत्रकार , सत्यम राय अविनाश राय , आशीष बाबा , भरत काका , सुजीत राय महिलाओं तथा युवक-युवतियों ने भाग लिया. विसर्जन यात्रा में शामिल सभी श्रद्धालु डीजे पर बजती गीतों की धुन पर नृत्य करते जय माता दी के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे. 
 
विसर्जन यात्रा से पूर्व दुर्गा पूजा पंडाल में महिलाओं ने विजयादशमी पर्व मनाया. मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर सिंदूर खेला की रस्म निभाई. इस मौके पर सभी सुहागन महिलाओं ने एक-दूसरे को सुहाग का प्रतीक सिंदूर लगाया. यह खास उत्सव मां की विदाई पर मनाया जाता है. दशहरा पूजा के बाद मां दुर्गा की विदाई होती है और इस उपलक्ष्य में सुहागिन महिलाएं उन्हें सिंदूर अर्पित कर आशीर्वाद लेती हैं. 
 
महिलाएं सिंदूर खेला के दिन पान के पत्तों से मां दुर्गा के गालों को स्पर्श कर उनकी मांग और माथे पर सिंदूर लगाकर अपने सुहाग की लंबी उम्र की कामना करती हैं

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